• गीता हिंदू धर्मग्रंथ नहीं, भारतीय दर्शन है!

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2012
    Group(s):
    Law, Technology and Society, Philosophy of Religion, Religious Studies
    Subject(s):
    Bhagavadgītā, Court rules, Hindutva, India--Madhya Pradesh, Bharatiya Janata Party
    Item Type:
    Editorial
    Tag(s):
    कोर्ट का फैसला, जबलपुर कोर्ट, स्कूलों में गीता
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/gfa2-pd26
    Abstract:
    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 जनवरी, 2012 के अपने फैसले में राज्य की भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों में 'गीता सार' पढ़ाए जाने को उचित ठहराते हुए कहा था कि गीता हिंदू धर्म ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन है। यह टिप्पणी उसी संदर्भ में है।
    Notes:
    यह टिप्पणी द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) पत्रिका के मार्च, 2012 अंक में प्रकाशित हुआ था। यहां अपलोड किया गया लेख अंग्रेजी व हिंदी दोनों भाषाओं में है। अंग्रेजी में इसका शीर्षक है: "Gita: Indian Philosophy, Not a Hindu Scripture!" अंग्रेजी लेख यहां देखा सकता है : https://doi.org/10.17613/st8j-ag71
    Metadata:
    Published as:
    Journal article    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution-NonCommercial

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    Item Name: pdf 2012-में-गीता-के-फैसले-पर-टिप्पणी-प्रमोद-रंजन-फारवर्ड-प्रेस.pdf
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