• जाति व्यवस्था और पितृसत्ता: पेरियार ई. वी. रामासामी

    Editor(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2020
    Group(s):
    Feminist Humanities, Gender Studies, General Education, Literary theory, Sociology
    Subject(s):
    Social justice, Progressivism in literature, Dalits in literature, Caste in literature, Dalits, Hinduism and politics, Blasphemy--Social aspects, Culture conflict, Rāmacāmi, Ī. Ve., Tantai Periyār, 1878-1973
    Item Type:
    Book
    Tag(s):
    Hindi literature--History and criticism, Caste-based discrimination, Social movements--Political aspects--Indian states--History
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/ghd5-2267
    Abstract:
    जाति और पितृसत्ता ई. वी. रामासामी नायकर के चिंतन, लेखन और संघर्षों की केंद्रीय धुरी रही है। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि इन दोनों के विनाश के बिना किसी आधुनिक समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है। जाति और पितृसत्ता के संबंध में पेरियार क्या सोचते थे और क्यों वे इसके विनाश को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य एवं अनिवार्य मानते थे? इन प्रश्नों का हिंदी में एक मुकम्मल जवाब पहली बार यह किताब देती है।
    Notes:
    इस किताब के परिशिष्ट खंड में पेरियार के संपूर्ण जीवन का वर्षवार लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। पेरियार क़रीब 94 वर्षों तक जीवित रहे और अनवरत अन्याय के सभी रूपों के खिलाफ संघर्ष करते रहे। किताब को यहाँ भी देखा जा सकता है- https://www.google.co.in/books/edition/Jati_Vyavstha_Aur_Pitri_Satta/r94WEAAAQBAJ
    Metadata:
    Published as:
    Book    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 month ago
    License:
    Attribution
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    Item Name: pdf जाति-व्यवस्था-और-पितृसत्ता-पेरियार-ई.-वी.-रामासामी.pdf
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